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कोरोना से गुजरात के भी हाल बेहाल

संकलन : Abhishek Sharma | प्रकाशन तिथि : 30-04-2021 20:45 | गुजरात समाचारअहमदाबाद समाचार

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  चुनाव भले वाराणसी से लड़ते हों और गुजरात उनका और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का गृह प्रदेश हो लेकिन यह राज्य भी बेहाल है। कोराना की इस दूसरी लहर में सैकड़ों लोगों, महिलाओं, बच्चों की मौत का कोहराम लगा है, बंगाल चुनावों की वजह से उनके कानों तक नहीं पहुंचा। जब चुनाव प्रचार थमा, तब जाकर ही शाह ने इस ओर नजर डालने की जहमत उठाई जबकि डॉक्टर राज्य और केंद्र सरकारों को मेडिकल ऑक्सीजन भेजने के लिए त्राहिमाम संदेश काफी पहले से लगातार भेज रहे थे।

शाह आए, तब उन्होंने अहमदाबाद में एक अस्पताल का उद्घाटन किया। जब वहां कोविड-संक्रमित रोगी पहुंचने लगे, तो उन्होंने पाया कि उसे पुलिस ने घेर रखा है और रोगी भर्ती नहीं किए जा रहे हैं।

कहने को यह आधुनिक अस्पताल है, पर यह काम नहीं कर रहा है और जो, बस, किसी फिल्म स्टूडियो की तरह यहां खड़ा है। यही नहीं, शाह ने अपने संसदीय क्षेत्र में आयुर्वेद अस्पताल में 280 लीटर के ऑक्सीजन प्लांट का भी उद्घाटन किया और दावा किया कि 'कम-से-कम 11 और प्लांट गुजरात में लगाए जाएंगे।' जब अहमदाबाद, वड़ोदरा, राजकोट समेत पूरे गुजरात में पचासों कोविड रोगी ऑक्सीजन के अभाव में काल के गाल में समा रहे थे, तब भी शाह यह कहकर अपनी पीठ थपथपाने से बाज नहीं आ रहे थे कि 'कई बड़े उद्योग होने की वजह से गुजरात में ऑक्सीजन उत्पादन की बेहतर व्यवस्था है।' राजकोट गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी का विधानसभा क्षेत्र है जबकि मोदी पहले वड़ोदरा से ही विधानसभा चुनाव लड़ते थे।

चारों तरफ हो रहे चीत्कार के बाद राज्य सरकार ने 23 अप्रैल को दो आईएएस अफसरों- धनंजय द्विवेदी और संजीव कुमार को ऑक्सीजन की सप्लाई को सरल तथा कारगर बनाने के ख्याल से नोडल ऑफिसर बनाया। उसी दिन ऑक्सीजन की कमी से राजकोट के एक निजी अस्पताल में चार लोग जान से हाथ धो बैठे। अहमदाबाद मेडिकल एसोसिएशन के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा भी, 'राजकोट, महसाना साबरकांठा और सुरेंद्र नगर समेत विभिन्न जिलों में अस्पताल ऑक्सीजन सप्लाई में कमी झेल रहे हैं। रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है जबकि मेडिकल ऑक्सीजन मांग के अनुरूप नहीं मिल रही है।'

राजकोट में लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर भरे जाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई लोग शिकायत कर रहे हैं कि अस्पतालों ने उनसे कहा हुआ है कि जरूरत होने पर ऑक्सीजन का इंतजाम उन्हें खुद करना होगा। राजकोट का यह हाल तब है जबकि जामनगर की रिलायंस पेट्रोलियम रिफाइनरी यहां से 93 किलोमीटर दूर है। इसने मेडिकल स्तर का अपना ऑक्सीजन उत्पादन 700 मीट्रिक टन तक बढ़ा दिया है। हाल यह है कि इसने 698 किलोमीटर दूर इंदौर के लिए 30 मीट्रिक टन ऑक्सीजन भेजा, तो भाजपा नेताओं ने फोटो खिंचवाने के खयाल से इसे पांच घंटे तक रोके रखा। वैसे, ऐसे गाढ़े वक्त में भी भाजपा नेता कहीं भीकुछ भी कर रहे हैं। एक ऑक्सीजन सप्लायर अपना माल लेकर जा रहा था, तो गुजरात के बोटाड शहर में उसे रोक लिया गया और वे मांग करने लगे कि उनके शहर के निजी अस्पतालों के लिए 220 सिलेंडर वह उतारकर ही आगे बढ़े।

अन्य जगहों की तरह यहां के लोग भी ट्विटर, फेसबुक और वाट्सएप ग्रुपों पर अपने मित्रों, रिश्तेदारों, परिचितों के लिए ऑक्सीजन की गुहार लगा रहे हैं। ऑक्सीजन लेवल चिंताजनक स्तर तक गिर जाए, तो आदमी करे क्या? वह हाथ-पैर तो मारेगा ही। हाल क्या है, एक उदाहरण से समझा जा सकता है। उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल स्वास्थ्य विभाग के भी मंत्री हैं। मेहसाणा उनका गृह जिला है। उनके यहां के भाग्योदय अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो रही थी, तो उसने लगभग 48 घंटे तक नए कोविड मरीजों की भर्ती से ही मना कर दिया। इस विकट स्थिति के बावजूद मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने एक गुजराती टीवी चैनल पर दावा किया कि गुजरात जल्द ही अमेरिका को लाइफ सेविंग दवाएं निर्यात करेगा क्योंकि 'हमारी फार्मास्युटिकल कंपनियां वैश्विक मांग पूरा करने के लिए दवाएं बनाने की टेक्निकल जानकारी रखती हैं।'

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