Bulletins Of India

सूरत के सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में 50% बेड तो खाली, लेकिन ऑक्सीजन की कमी के चलते मरीजों को लौटाया जा रहा

संकलन : Vyas Sachin | प्रकाशन तिथि : 30-04-2021 15:06 | गुजरात समाचारसूरत समाचार

 

सांसों की कमी :

सूरत शहर के मरीजों का अब भगवान ही मालिक है, क्योंकि अब सिविल अस्पताल के गेट मरीजों के लिए बंद हो गए हैं। इससे पहले स्मीमेर ने मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया था। निजी अस्पताल तो दो-तीन दिन पहले से एडमिशन बंद कर चुके हैं। दरअसल, सिविल में 50 % बेड खाली हैं, लेकिन ऑक्सीजन की कमी से अब मरीज एडमिट नहीं किए जा रहे हैं। सिविल के प्रबंधन का कहना है कि सरकार को तीन दिन से ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाने के लिए पत्र लिख रहे हैं। मंगलवार को सरकार ने सर्कुलर जारी कर स्पष्ट कह दिया कि रोज 46 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिलेगी।

200 मरीजों को आइसोलेशन सेंटरों पर भेजा 

बुधवार को सिविल अस्पताल के गेट बंद कर दिए गए। इससे मरीजों को लेकर पहुंची 108 एंबुलेंस की कतार लग गई । बाद में मरीजों को लेकर एंबुलेंस आईसोलेशन सेंटर चली गईं। शहर के आईसोलेशन सेंटर भी आगामी 4 से 5 दिनों में फुल हो जाएंगे। शहर में 25 से 30 आइसोलेशन सेंटर चल रहे हैं।

यहां ऑक्सीजन के साथ इलाज किया जा रहा है। 108 सर्विस सूरत के मैनेजर फेज पठान ने बताया कि मंगलवार से स्मीमेर और बुधवार से सिविल अस्पताल ने 108 के मरीजों को एडमिट करने से मना कर दिया और गेट बंद कर दिए। अब हम मरीजों को आइसोलेशन सेंटर ले जा रहे हैं। रोज लगभग 200 मरीज आइसोलेशन सेंटर ले जा रहे हैं।

अभी 55-56 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत 

सिविल में पहले रोज 60-65 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की खपत होती थी। यह 1700 से 1,800 मरीजों के इलाज के लिए पर्याप्त थी। सरकार द्वारा 10% की कटौती करने के बाद अब रोज मात्र 46 मीट्रिक टन ही ऑक्सीजन मिल पा रही है।

सिविल अस्पताल में 2,250 बेड की क्षमता है। इस समय 1000 से अधिक मरीज भर्ती हैं। इनमें 360 मरीज ICU में और अन्य ऑक्सीजन पर हैं। करीब 150 मरीज संदिग्ध हालत में हैं। जितने मरीज अभी भर्ती हैं उनके लिए 55-56 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है।

हमने सरकार को जानकारी दी थी फिर भी कटौती कर दी

 पिछले तीन दिन से ऑक्सीजन की समस्या है। हमने सरकार को इसकी जानकारी दी थी, लेकिन उन्होंने मंगलवार को लिखित में कह दिया कि अभी रोज 46 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिलेगी। सिविल में जो भर्ती मरीज हैं उन्हें ही 50 से 55 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है। नए आने वाले मरीजों के लिए अल्टरनेट व्यवस्था की गई है। उन्हें आइसोलेशन सेंटर और निजी अस्पताल भेजा जा रहा है।

-मिलिंद तोरावडे, कोरोना नोडल ऑफिसर, सिविल

 

 

बुलेटिन्स ऑफ इंडिया पर अन्य अद्यतन